रुद्राक्ष सुझाव रिपोर्ट की मदद से आप अपने लिए सही रुद्राक्ष का चुनाव कर सकेंगे। सही रुद्राक्ष को धारण करने के बाद आपको प्रत्येक क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। क्योंकि रुद्राक्ष नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है।
रुद्राक्ष का महत्व
रुद्राक्ष मुख्य रूप से एक बीज होता है, जो रुद्राक्ष वृक्ष से प्राप्त होता है। यह मूल रूप से संस्कृत का शब्द है जो दो ‘रुद्र’ और ‘अक्ष’ को मिलाकर बना है। इसमें रुद्र का अर्थ भगवान शिव है, जबकि अक्ष का मतलब भगवान शिव के अश्रु (आंसू) हैं। अर्थात रुद्राक्ष का संयुक्त अर्थ ‘भगवान शिव की आँख’ से है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रुद्राक्ष उत्पत्ति भगवान शिव के आँसुओं की बूँदों से हुई हैं।
एक मुखी रुद्राक्ष
दो मुखी रुद्राक्ष-
तीन मुखी रुद्राक्ष-
पाँच मुखी रुद्राक्ष –
सात मुखी रुद्राक्ष –
नौ मुखी रुद्राक्ष-
दसमुखी रुद्राक्ष-
तेरह मुखी रुद्राक्ष-
गौरी शंकर रुद्राक्ष
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. रुद्राक्ष क्या है? क्या यह लैब द्वारा प्रमाणित है?
वनस्पति शास्त्र के अनुसार रुद्राक्ष की गुरिया रुद्राक्ष बीज है जो इसके फल से प्राप्त होता है। इसके वृक्ष मुख्य रूप से दक्षिण पूर्वी एशियाई क्षेत्र जैसे- सुमात्रा, जावा, बाली, जया, नेपाल और इण्डोनेशिया में पाए जाते हैं। एस्ट्रोसेज पर हमारे पास 14 प्रकार के रुद्राक्ष और इसकी माला उपलब्ध है। ये रुद्राक्ष एस्ट्रो जेम्स एंड लैब्स (एक मुखी रुद्राक्ष के लिए) और एसएस जेम्स एंड रुद्राक्ष रिसर्च सेंटर (शेष सभी रुद्राक्ष) द्वारा प्रमाणित हैं। हम अपने ग्राहकों को रुद्राक्ष के साथ लैब का प्रमाणपत्र भी देते हैं जिसमें रुद्राक्ष से संबंधित सभी ज़रुरी जानकारी निहित होती है।
Q2. रुद्राक्ष को कौन धारण कर सकता है?
रुद्राक्ष को धारण करने के लिए जाति, धर्म, लिंग, मान्यता और उम्र की कोई बाध्यता नहीं है। इनको पाप से मुक्ति तथा विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए धारण किया जाता है। इसलिए कोई भी व्यक्ति बिना किसी ग़लतफ़हमी के हमारे यहाँ से रुद्राक्ष ऑर्डर कर सकता है। धारण करने वाले व्यक्ति का मन साफ होना चाहिए। इसके अधिक से अधिक लाभ पाने के लिए इसे दिन में 12 से 14 घंटे धारण करना चाहिए। इसे पहनकर मांस-मछली और शराब इत्यादि से दूर रहें। यदि रुद्राक्ष को धारण करने से पहले आपके मन में किसी प्रकार की शंका हो तो आप हमारे विद्वान ज्योतिषियों से परामर्श ले सकते हैं।
Q3. क्या रुद्राक्ष को धारण करने से किसी प्रकार के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?
रुद्राक्ष को धारण करने से कोई बुरे प्रभाव धारण करने वाले व्यक्ति के ऊपर नहीं पड़ते हैं। यद्यपि इसके धारण करने के कुछ नियम एवं विधि को बताया गया है जिसका पालन अवश्य करना चाहिए। इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और उसके साहस में वृद्धि होती है। रुद्राक्ष में चमत्कारिक शक्तियाँ समाहित होती है जो वातावरण और शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित कर उसे सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तन करती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार रुद्राक्ष का संबंध प्रत्यक्ष रूप से नौ ग्रहों से होता है और यह उन्हें नियंत्रण में रखता है।
Q4. क्या कोई विभिन्न रुद्राक्षों की माला या ब्रेसलेट धारण कर सकता है?
हाँ जी, कोई भी व्यक्ति विभिन्न रुद्राक्षों से बनी माला या ब्रेसलेट को धारण कर सकता है। इसमें सिद्ध माला 1-14 मुखी या 1-21 मुखी की होती हैं। यह माला बहुत लाभकारी होती है और धारण करने के बाद तत्काल इसके प्रभावों को कोई भी अनुभव कर सकता है। एस्ट्रोसेज पर आप एक असली और लैब द्वारा प्रमाणित रुद्रक्ष की माला या ब्रेसलेट को बहुत ही किफायती दाम पर ख़रीद सकते हैं। हालांकि बाज़ार में नकली रुद्राक्षों की मालाओं की कमी नहीं है। लेकिन हम 100 फीसदी वास्तविक रुद्राक्ष की माला उपलब्ध कराते हैं।
Q5. यदि मुझे रुद्राक्ष की क्वालिटी पसंद नहीं आई तो क्या मैं इसे वापस कर सकता हूँ?
जी हाँ बिल्कुल, यदि आपको रुद्राक्ष को लेकर कोई शिकायत हो तो आप इसे 7 दिनों के अंदर लौटा सकते हैं। इसके लिए आपको हमारे कस्टमर सपोर्ट एग्जीक्यूटिव से संपर्क करना होगा और आपको कुछ ज़रुरी जानकारी देनी होगी। जिस प्रकार से आपके पास उत्पाद की डिलीवरी हुई थी आप उसे उसी रूप में लौटा सकते हैं।
Q6. आपके रुद्राक्ष की क्या ख़ास विशेषता है?
आप रुद्राक्ष कहीं से भी सस्ते-महँगे दाम में ख़रीद सकते हैं। लेकिन कोई भी रुद्राक्ष विक्रेता आपको उसकी क्वालिटी और उसकी विश्वसनीयता की लिखित में गारंटी नहीं देगा। परंतु आप एस्ट्रोसेज पर 100 प्रतिशत असली और सर्वश्रेष्ठ क्वालिटी के रुद्राक्ष किफायती दाम पर प्राप्त कर सकते हैं। हम अपने ग्राहकों को रुद्राक्ष के साथ लैब द्वारा सर्टिफाइड उसका प्रमाण-पत्र भी देते हैं, तथा उन्हें इसको धारण करने की विधि और इसके लाभ तथा महत्व के बारे में बताते हैं। इसलिए हमारे प्रोडक्ट्स देशभर में विश्वसनिय और लोकप्रिय हैं।